नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम हो गया है। और इस पर इजराइल ने भी सहमति दे दी है। यह सीजफायर 2 सप्ताह का होगा। और इस बीच कोई भी देश किसी दूसरे देश पर किसी तरह की सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा। युद्ध विराम अमेरिका के दिए गए 15 प्वांइट और ईरान की ओर से पेश 10 प्वाइंट के प्रस्तावों के आइने में हुआ है। दोनों देशों को इसके लिए तैयार करने में पाकिस्तान ने महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभायी है। पाक पीएम शाहबाज शरीफ ने बताया है कि 10 अप्रैल से दोनों देशों के आधिकारिक प्रतिनिधियों की इस्लामाबाद में औपचारिक वार्ता शुरू होगी।
इस सिलसिले में सबसे पहले सुबह चार बजकर दो मिनट पर ट्रम्प की ट्रुथ सोशल पर पोस्ट आयी। जिसमें उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और फील्ड मार्शल Asim Munir से हुई बातचीत के आधार पर—जिन्होंने मुझसे अनुरोध किया कि आज रात ईरान की ओर भेजी जा रही विनाशकारी कार्रवाई को रोका जाए—और इस शर्त पर कि इस्लामिक गणराज्य ईरान Strait of Hormuz को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत हो, मैं दो सप्ताह के लिए ईरान पर बमबारी और हमले रोकने के लिए सहमत हूँ। यह दोनों पक्षों की तरफ से युद्धविराम होगा।

ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि हम अपने सभी सैन्य उद्देश्यों को हासिल कर चुके हैं, बल्कि उनसे आगे बढ़ चुके हैं, और ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति तथा मध्य पूर्व में शांति को लेकर एक ठोस समझौते के काफी करीब हैं। हमें ईरान की ओर से 10 बिंदुओं का प्रस्ताव मिला है, और हमें लगता है कि यह बातचीत के लिए एक अच्छा आधार है। अमेरिका और ईरान के बीच पहले के लगभग सभी विवादित मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन यह दो हफ्तों का समय समझौते को अंतिम रूप देने के लिए दिया जा रहा है।
संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में, और मध्य पूर्व के देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए, मेरे लिए यह सम्मान की बात है कि यह लंबे समय से चला आ रहा मुद्दा अब समाधान के करीब है। इस विषय पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद।
उसके बाद ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अरागची ईरानी सुप्रीम सिक्योरिटी कौंसिल की तरफ से उस प्रस्ताव को ट्विटर पर शेयर करते हैं जिसको उसने हकी झंडी दी है। इसमें कहा गया है कि सबसे पहले पाक प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और वहां के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का शुक्रिया अदा करते हैं। भाई पीएम शरीफ के अपने ट्वीट में निवेदन, और 15 प्वाइंट के प्रस्ताव के साथ समझौते का अमेरिकी रिक्वेस्ट तथा ईरान के 10 प्रस्तावों को समझौते का आधार बनाने की अमेरिकी राष्ट्रपति की घोषणा के बाद सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी कौंसिल की तरफ से हम घोषणा करते हैं कि
अगर ईऱान के खिलाफ हमले को रोका जाता है तो हमारी ताकतवर आर्म्ड फोर्सेज अपने रक्षात्मक आपरेशन को रोक देंगी।

इसके साथ ही उसमें आगे कहा गया है कि ईरानी आर्म्ड फोर्सेज के साथ कोआर्डिनेशन के जरिये दो सप्ताह के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सेफ पैसेज उपलब्ध रहेगा।
अरागची के इस ट्वीट को राष्ट्रपति ट्रम्प अपने मीडिया प्लेटफार्म ट्रुथ सोशल पर भी शेयर करते हैं।
उसके बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ का बयान आता है। जिसमें वो आगे समझौते के लिए बातचीत और उसकी पूरी रुपरेखा बताते हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ट्विटर पर जारी अपने बयान में कहते हैं कि पूरी विनम्रता के साथ, मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इस्लामिक गणराज्य ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका, अपने सहयोगियों के साथ, लेबनान सहित हर जगह तुरंत प्रभाव से युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं।
मैं इस समझदारी भरे कदम का दिल से स्वागत करता हूँ और दोनों देशों के नेतृत्व का गहरा आभार व्यक्त करता हूँ। साथ ही, मैं उनके प्रतिनिधिमंडलों को शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद आने का निमंत्रण देता हूँ, ताकि सभी विवादों के स्थायी समाधान के लिए आगे बातचीत की जा सके।

दोनों पक्षों ने समझदारी और आपसी समझ का अच्छा परिचय दिया है और शांति व स्थिरता को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक तरीके से बातचीत जारी रखी है। हमें उम्मीद है कि ‘इस्लामाबाद वार्ता’ सफल होगी और स्थायी शांति स्थापित करेगी, और आने वाले दिनों में हम और अच्छी खबरें साझा कर पाएंगे।
इससे पहले ईऱान 10 बिंदुओं वाला एक पीस प्रस्ताव देता है। जिसको अमेरिका बातचीत के आधार के लिए स्वीकार कर लेता है। इनमें शामिल प्रमुख बिंदुओं को नीचे दिया गया है।
1-“ईरानी सशस्त्र बलों के साथ समन्वय में Strait of Hormuz से नियंत्रित आवाजाही, जिससे ईरान को खास आर्थिक और भू-राजनीतिक स्थिति मिले,”
2-“रेजिस्टेंस धुरी (axis of resistance) के सभी पक्षों के खिलाफ चल रहे युद्ध को समाप्त करना,”
3-“क्षेत्र में मौजूद सभी ठिकानों और तैनाती स्थानों से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी,”
4-“हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवागमन का ऐसा नियम बनाना, जिससे तय समझौते के अनुसार ईरान की प्रमुख भूमिका बनी रहे,”

5-“अनुमान के अनुसार ईरान को हुए सभी नुकसान का पूरा भुगतान,”
6-“सभी तरह के प्रतिबंधों (प्राथमिक और द्वितीयक) को हटाना और गवर्नर्स बोर्ड तथा सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को खत्म करना,”
7-“विदेशों में जमी ईरान की सभी संपत्तियों और धन को मुक्त करना,”
8-“और अंत में, इन सभी बातों को एक बाध्यकारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में मंजूरी देना।”
इसके पहले रात भर पूरी दुनिया में तनाव अपने चरम पर था। 8 बजे का डेडलाइन खत्म हो गया था और ईरान ने सीधे बातचीत के सभी रास्तों को बंद करने का ऐलान कर दिया था। ट्रम्प की पूरी सिविलाइजेशन को नष्ट करने की धमकी पर पूरी दुनिया में तीखी प्रतिक्रिया हो रही थी। अमेरिका में तो मानो ज्वार आ गया। विपक्षी नेताओं से लेकर, बुद्धिजीवियों, प्रतिष्ठित नागरिकों से लेकर तमाम आम लोगों ने ट्रम्प के खिलाफ बयानों की झड़ी लगा दी। और ट्रम्प को तत्काल हटाए जाए जिसमें अमेडमेंट 25 को लागू करने की चौतरफा मांग शुरू हो गयी।
इस बीच ईरान के हजारों हजार की संख्या में नागरिकों ने तमाम सिविल फैसिल्टीज के इर्द-गिर्द मानव श्रृंखला बनानी शुरू कर दी। जिसमें सैकड़ों जगहों पर लाखों की संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। उन ठिकानों पर किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई हजारों लोगों के जीवन को खतरे में डाल सकती थी। शायद इन्हीं परिस्थितियों का दबाव था जिससे ट्रम्प को इस समझौते के लिए मजबूर होना पड़ा है।
(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)